बच्चों के लिए अनुशासन पर निबंध 250 शब्द / Anushan Par Nibandh / Essay On Discipline In Hindi : 

बच्चों के लिए अनुशासन पर निबंध 250 शब्द / Anushan Par Nibandh / Essay On Discipline In Hindi :  

 

बच्चों आज हम आप सभी लोगों के लिए अनुशासन यानी डिसिप्लिन पर बहुत ही सुंदर निबंध लाया हूं आप लोग इस निबंध को अपने परीक्षा या स्कूल कॉलेज में लिख सकते हो आगे दिए गए निबंध को अच्छी तरीका से पढ़िए और लिखिए।

 

अनुशासन पर निबंध 250 शब्दों में

भूमिका :- अनुशासन का अर्थ है – व्यवस्था, कर्म और आत्म नियंत्रण। यह एक ऐसा गुण है जो समय की बचत करता है, धन और शक्ति का अपवाह रोकता है तथा अतिरिक्त बल पैदा करता है। अनुशासन का मानव जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। जीवन को आनंदपूर्वक जीने के लिए विद्या और अनुशासन दोनों आवश्यक है। विद्या का अंतिम लक्ष्य है – इस जीवन को मधुर तथा सुविधा पूर्वक बनाना। तथा अनुशासन का भी यही लक्ष्य है।

अनुशासन भी एक प्रकार की विधा है। अपनी दिनचर्या को,अपनी बोलचाल को, अपने रहन-सहन को, अपने सोच विचार को, अपने समस्त व्यवहार को व्यवस्थित करना ही अनुशासन है। एक अनपढ़ गवार व्यक्ति के जीवन में कम और व्यवस्था नहीं होती इसलिए उसे असभ्य अशिक्षित कहा जाता है। पढ़े लिखे व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि उसका सब कुछ व्यवस्थित हो। अतः अनुशासन विद्या का एक अनिवार्य अंग है।

 

छात्र जीवन में अनुशासन का महत्व /अनुशासन का महत्व :- अनुशासन से सैयम आया है तथा सभ्यता का प्रारंभ होता है। आज की नवीन सभ्यता अनुशासन की ही देन है। ग्रामीण सभ्यता में कोई रहन-सहन का व्यवस्थित तरीका नहीं, बोलचाल में अनुशासन नहीं, इसलिए वे पीछे जाते हैं। दूसरी और शहरी सभ्यता में हर चीज की एक व्यवस्था है, बोलने का, कार्य करने में एक नियमित क्रम है, इसलिए आज उसका आकर्षण है।

विद्यार्थी के लिए अनुशासन होना परम आवश्यक है। अनुशासन से विद्यार्थी को सब प्रकार का लाभ ही होता है। हू अनुशासन अर्थात निश्चित व्यवस्था से समय और धन की बचत होती है। जी सातों ने अपने दिनचर्या निश्चित कर ली है उसका समय व्यर्थ नहीं जाता। वह अपने एक-एक क्षण का सचमुच उपयोग करता है। वह समय पर मनोरंजन भी कर देता है साथ ही अपना अध्ययन भी पूरा कर पता है। इसके विपरीत अनुशासनहीन छात्र आज का काम चल पर और कल का काम परसों पर डालकर अपने लिए मुसीबत इकट्ठा कर लेता हैं।

किसी ने ठीक ही कहा है :-

बिना कार्य के पूर्ण भए ,जोनाथन से सोय।

सफल वह महान है सदा, जो अनुशासन में हो।

अनुशासनहीनता के कारण :- आज भारत के जनजीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासनहीनता दृष्टिगोचर हो रही है। विद्यार्थी की रुचि पढ़ाई की ओर नहीं है। अनुशासनहीनता के कारण है – आज का विद्यार्थी की साज, सिंगर, सुख आराम की इच्छा। दूसरी बात माता-पिता द्वारा अच्छी तरह ध्यान नहीं देना, खराब संगत।

 

सुधार के उपाय  :- अनुशासन का गुण बचपन में ही ग्रहण किया जाना चाहिए। इसलिए इसका संबंध छात्रा से है। विद्यालय की सारी व्यवस्था में अनुशासन और नियमों का लागू करने के पीछे यही बात है। यह कारण है कि अच्छे अनुशासित विद्यालयों के छात्र जीवन में अच्छी सफलता प्राप्त करते हैं। अनुशासन हमारे अस्त-व्यस्त जिंदगी को साफ सुथरी तथा सुलझी हुई व्यवस्था देता है। इसके कारण हमारी शक्तियों केंद्रित होती है। हमारा जीवन उद्देश्य पूर्ण बनता है तथा हम थोड़े समय में ही बहुत कम कर पाते हैं।

 

अनुशासन ही छात्र को सही दिशा दिखलाता है / अनुशासन का मार्गदर्शन :- छात्रों को अनुशासन प्रिया होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि अनुशासन ही छात्रों को सही दिशा दिखला सकता है। शिक्षकों और गुरुजनों के अनुशासन में रहकर ही छात्र समुचित रीति से विद्या ग्रहण करते हैं और अपने चरित्र को उन्नत बनाते हैं। छात्र अनुशासन की संस्कृति से लाभान्वित होकर ही विश्व में अपने यश की सुगंध फैला सकते हैं।

 

अनुशासनहीनता के दुष्प्रभाव :- अब मानव मन ही होच – पॉच को ले। एक छात्रा को एक ही समय पर विवाह की पार्टी में भी जाना है, क्रिकेट का मैच भी खेलना है, दूरदर्शन पर आई फिल्म को भी देखना है और कल होने वाली परीक्षा की तैयारी भी करनी है। इस अस्त व्यस्त मन स्थिति में प्राय छात्र लटक जाते हैं। वे एक साथ चारों ओर मन लगाकर किसी भी एक कार्य को ध्यान से नहीं कर पाते। यदि कोई छात्र अनुशासन का अस्थाई हो तो वह आवश्यक ही संयम करके चारों के गुण दोष का विचार करके कि एक और अपना ध्यान लगा लेगा तथा शेष की ओर से अपना मन हटा लेगा। इस हाेच – पोच मन स्थिति में यही एक उत्तम रास्ता है।

 

अनुशासन का निष्कर्ष/उपसंहार :- अनुशासन से शक्तियों का केंद्रीकरण होता है। गतिशील ऊर्जा का जन्म होता है तथा जीवन सहज गरल और सुंदर बन जाता है। अनुशासन का अर्थ बंधन नहीं है। इसका अर्थ है व्यवस्था। हां, उसे व्यवस्था के लिए कुछ अनुचित इच्छाओं से छुटकारा पाना पड़ता है। उनसे छुटकारा पाने में लिए ही लाभ है। छात्र यदि सभी बनने के लिए अपनी गलत आदतों पर रोक लगाते हैं, तो वह लाभप्रद ही है। अतः अनुशासन जीवन के लिए परम आवश्यक है। तथा उसकी प्रथम पाठशाला है विद्यार्थी जीवन। अनुशासन पर निबंध

तो बच्चों आप लोग को अनुशासन पर निबंध कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइए।

 

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